राजस्थान के राज्यपाल ( Rajasthan Governers ) Best tricks

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राज्यपाल (Governor)

ऐतिहासिक पहलू: ब्रिटिश भारत में राज्यपाल निरंकुशता के प्रतीक थे, जबकि स्वतंत्र भारत में वे केंद्र और राज्य के बीच एक कड़ी का कार्य करते हैं।

Rajasthan Governer


राजस्थान का संदर्भ:

वर्ष 1956 से पूर्व 'राजप्रमुख' पद था। राजस्थान के प्रथम राजप्रमुख सवाई मानसिंह थे।
राजस्थान के प्रथम राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह थे (शपथ: 1 नवम्बर, 1956)

संवैधानिक प्रावधान:

अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। 7वें संविधान संशोधन (1956) के तहत एक ही व्यक्ति दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल बन सकता है।
अनुच्छेद 154: राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होगी।
अनुच्छेद 155: नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा केंद्र सरकार की अनुशंसा पर की जाती है (कनाडा के मॉडल पर)।
अनुच्छेद 156 (पदावधि): राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है। सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष है।
अनुच्छेद 157 (योग्यता): भारत का नागरिक हो और 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हो।
अनुच्छेद 158 (शर्तें): वह लाभ के पद पर न हो और न ही संसद/विधानमंडल का सदस्य हो। वर्तमान वेतन 3.50 लाख रुपये मासिक है।
अनुच्छेद 159 (शपथ): उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाई जाती है।

राज्यपाल की शक्तियाँ एवं कार्य

1. कार्यपालिका शक्तियाँ:

मुख्यमंत्री एवं उनकी सलाह पर अन्य मंत्रियों की नियुक्ति।
RPSC के अध्यक्ष/सदस्य, राज्य निर्वाचन आयोग और वित्त आयोग की नियुक्ति।
राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (Chancellor) होते हैं (विधि विश्वविद्यालय को छोड़कर, जिसके कुलाधिपति मुख्य न्यायाधीश होते हैं)।
पश्चिमी क्षेत्रीय सांस्कृतिक विकास केंद्र (उदयपुर) और सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं।

2. विधायी शक्तियाँ:

अनुच्छेद 171: विधान परिषद् में 1/6 सदस्यों का मनोनयन।
अनुच्छेद 174: सत्र आहूत करना, सत्रावसान करना और विधानसभा भंग करना।
अनुच्छेद 200: विधेयकों पर अनुमति देना, रोकना या राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखना।
अनुच्छेद 213: विधानमंडल के सत्र में न होने पर अध्यादेश (Ordinance) जारी करना।

3. वित्तीय शक्तियाँ:

बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) विधानसभा में रखवाना।
धन विधेयक राज्यपाल की पूर्वानुमति से ही पेश किया जाता है।
राज्य वित्त आयोग का गठन (प्रति 5 वर्ष)।

4. न्यायिक शक्तियाँ:

अनुच्छेद 161: क्षमादान की शक्ति (लघुकरण, परिहार, विराम आदि)। नोट: राज्यपाल मृत्युदंड को पूर्णतः माफ नहीं कर सकते।
जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण।

5. स्वविवेकीय शक्तियाँ (Discretionary Powers):

अस्पष्ट बहुमत की स्थिति में मुख्यमंत्री का चयन।
अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना।
विधेयक को राष्ट्रपति हेतु आरक्षित करना।

महत्त्वपूर्ण वाद एवं निर्णय

एस. आर. बोम्मई बनाम भारत सरकार (1994): अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर रोक और बहुमत परीक्षण राजभवन के बजाय विधानमंडल में करने का निर्देश।

Note: राजभवन का नया नाम: 1 दिसंबर, 2025 की अधिसूचना के अनुसार राज्य के 'राजभवन' का नाम बदलकर 'लोकभवन' कर दिया गया है।

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